
पत्रकारिता में मेरी यात्रा
अरे यार, मैं तो बस एक साधारण से पत्रकार हूँ। नाम है मनीषा। 2003 से ही मैं इस क्षेत्र में हूँ। इन 20 सालों में मैंने कुछ तो कुछ देखा है। आज मैं आपको कुछ विचित्र घटनाक्रम बताने जा रही हूँ जो मेरे साथ हुए हैं।
पहली बार जब मैंने अपने संपादक से मिलने के लिए ऑफिस में प्रवेश किया था, तो मैं थोड़ी नर्वस थी। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, मैं अपनी जगह बना लेती गई।
कौन थे मेरे साथी?
मेरे साथ काम करने वाले लोग भी बहुत ही अनोखे थे। एक colleague named Dave था जो हमेशा मुझे हंसाता रहता था। एक दिन उसने मुझसे पूछा, “मनीषा, तुमने कभी सोचा है कि पत्रकारिता में कितने ही विचित्र पल होते हैं?” मैंने कहा, “हाँ, बिल्कुल। लेकिन ये तो हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बन गया है।”
एक बार मैं एक conference में Austin गई थी। वहाँ मैंने एक lady named Priya से मिली। वह मुझसे बोली, “मनीषा, तुम तो बहुत brave हो।” मैंने कहा, “नहीं यार, बस अपना काम कर रही हूँ।”
विचित्र घटनाक्रम
तो चलो शुरू करते हैं।
पहली घटना हुई थी 2005 में। मैं एक छोटे से शहर में एक story cover कर रही थी। वहाँ की एक lady named Rani ने मुझे बताया कि उसके घर में एक ghost रहता है। मैंने सोचा, “क्या बात है!” लेकिन जैसे ही मैं उसके घर के अंदर गई, मुझे एक अजीब सी feeling हुई। मैंने अपने संपादक को फोन किया और कहा, “अरे, यहाँ तो सच में कुछ है।”
दूसरी घटना हुई थी 2010 में। मैं एक sports event cover कर रही थी। वहाँ पर एक player ने मुझसे कहा, “तुम्हें देख कर मुझे याद आ रहा है my childhood।” मैंने कहा, “क्या बात है?” उसने कहा, “नहीं, कुछ नहीं।” लेकिन मैं समझ गई कि वह कुछ छुपा रहा है।
तीसरी घटना हुई थी 2015 में। मैं एक restaurant में बैठी हुई थी और एक book पढ़ रही थी। Suddenly एक guy आकर बैठ गई मेरी table पर। उसने मुझसे पूछा, “तुम्हें यह book पसंद है?” मैंने कहा, “हाँ, बहुत।” उसने कहा, “मैं भी पढ़ता हूँ।” और फिर हमारी friendship शुरू हो गई।
चौथी घटना हुई थी 2018 में। मैं एक office meeting में बैठी हुई थी। Suddenly मेरे phone पर एक message आया। मैंने देखा तो पता चला कि मेरा एक old friend बिमार है। मैंने तुरंत उसे call किया और पूछा, “क्या हुआ?” उसने कहा, “कुछ नहीं, बस थोड़ी सी fever है।” लेकिन मैं चिंतित हो गई और तुरंत उसके घर गई।
पांचवी घटना हुई थी 2020 में। COVID का समय था। मैं अपने घर में बैठी हुई थी और एक article लिख रही थी। Suddenly मेरे doorbell बजा। मैंने देखा तो पता चला कि मेरे लिए एक package आया है। मैंने खोल कर देखा तो पता चला कि मेरे एक reader ने मुझे एक gift भेजा है। मैंने उसे thank you message भेजा और कहा, “आपने मेरा दिन bright कर दिया।”
पत्रकारिता में tips
अब कुछ tips बताती हूँ जो मैं अपने experience से सीखी हूँ।
पहली tip है कि हमेशा honest रहो। अगर तुम्हें कुछ पता नहीं है तो बोलो कि नहीं पता। नहीं तो people को लगता है कि तुम जानते हो लेकिन तुम नहीं जानते।
दूसरी tip है कि हमेशा prepared रहो। कभी भी क्या हो सकता है यह नहीं कहा जा सकता। इसलिए हमेशा तैयार रहो।
तीसरी tip है कि हमेशा positive रहो। life में बहुत सारी difficulties आती हैं लेकिन हमें उनसे लड़ना चाहिए और positive रहना चाहिए।
एक बार मैंने एक article पढ़ी थी West Bengal sports clubs results के बारे में। उस article से मैंने सीखा कि कैसे एक sports club अपने players को motivate करता है। यह बहुत interesting था।
चौथी tip है कि हमेशा learn करते रहो। कभी भी नहीं कहना चाहिए कि मैं सब जानता हूँ। हमेशा कुछ न कुछ नया सीखते रहो।
पांचवी tip है कि हमेशा respect करो। हर किसी को respect करो चाहे वह छोटा हो या बड़ा।
छठी tip है कि हमेशा confident रहो। अगर तुम confident हो तो तुम किसी भी situation से निपट सकते हो।
सातवी tip है कि हमेशा humble रहो। अगर तुम humble हो तो लोग तुम्हें पसंद करेंगे।
आठवीं tip है कि हमेशा patient रहो। कुछ चीजें समय लेती हैं। इसलिए patient रहो और अपने काम पर focus करो।
नौवीं tip है कि हमेशा passionate रहो। अगर तुम passionate हो तो तुम किसी भी challenge को accept कर सकते हो।
दसवीं tip है कि हमेशा yourself को improve करो। हमेशा कुछ न कुछ नया सीखो और खुद को improve करो।
अंत में
तो ये थे मेरे साथ हुए कुछ विचित्र घटनाक्रम। मैं hope करती हूँ कि आपको ये article पसंद आया होगा। अगर आपको भी कोई विचित्र घटना हुई हो तो मुझे comment में बताइए।
धन्यवाद!
लेखक परिचय: मनीषा 2003 से पत्रकारिता कर रही हैं। उन्होंने कई major publications के लिए काम किया है और अब वे एक senior magazine editor हैं। वे अपने articles में हमेशा honest और passionate रहती हैं।


